सोसायटी फार बाबूजीज़ मिशन

Posted On Saturday, January 12, 2013 | 4:02:59 PM

सोसायटी फार बाबूजीज़ मिशन

6/2, राणा प्रताप बाग, दूसरी मंजिल, दिल्ली-110007

 

सहज मार्ग

 

हम लोग सदियों से पौराणिक कथाएं, चरित्रों, सिद्धांतों, आदर्शों आदि के बारे में बड़े-बड़े महात्माओं, संतों और वक्ताओं से सुनते चले आ रहे हैं । हमारे पौराणिक ग्रंथ समस्त मानवता के लिए एक धरोहर हैं । यह सब हमारे जीवन के लक्ष्य और गौरवशाली अतीत के बारे में बताते हैं जिससे हमें उस दिशा में चलने की प्रेरणा मिले ।

 

यह सब सही है । सुनने और पढ़ने में हमें ज्ञान मिलता है, मार्गदर्शन होता है कि हम स्वयं (आत्मा) को बढ़ाने या पाने के लिए सही दिशा तय कर पावें । लेकिन केवल दिशा निर्धारित मात्र से ध्येय की प्राप्ति आवश्यक नहीं है ।

 

व्यावहारिक तरीके से ध्येय की प्राप्ति संभव ही नहीं है, बल्कि इस तरह से अच्छे अभ्यास ज्यादा कारगर संभावनाओं और हितकर नतीज़ों को पाने का मार्ग भी खुलता है ।

 

ध्येय की प्राप्ति हेतु हम एक बहुत स्वाभाविक और सादे ढंग से ध्यान का तरीका बताते हैं । इस पद्धति या तरीके को सहज मार्ग कहते हैं । यह अंतिम ध्येय तक पहुंचने का सबसे छोटा मार्ग है । यह ध्यान रहे कि सबसे छोटा रास्ता केवल एक ही होता है ।

 

सहज मार्ग की स्थापना श्रद्धेय रामचन्द्र जी महाराज शाहजहांपुर (यू0पी)) निवासी, जो कि आदर भाव सेबाबूजीके नाम से जाने जाते हैं, ने की थी । प्रकृति के नियमानुसार किसी पद्धति (system) के प्रवक्ता (Founder) का न ही कोई गुरू होता है और न ही उसका कोर्इ उत्तराधिकारी होता है । सहज मार्ग को अपनाकर  इस जीवन काल में अंतिम लक्ष्य प्राप्त कीजिए

 

 

सहज मार्ग में ध्यान का तरीका (पद्धति)

 

सहज मार्ग पद्धति में हम ध्यान केवल हृदय पर करते हैं । एक बार इस संकल्प को लेते हुए कि ईश्वरीय प्रकाश या दिव्य प्रकाश हमारे हृदय में है । इस बीच जो विचार आते हैं उन पर हम ध्यान नहीं देते, जिस प्रकार बिना बुलाए मेहमान का स्वागत करते हैं । अगर हम उन विचारों की रौ (श्रृंखला) में बह जाते हैं तो फिर ध्यान हृदय पर सरल स्वभाव से वापिस ले आते हैं । सहज मार्ग में ध्यान लगाने का यही स्वाभाविक और सरल तरीका है ।

 

लेकिन सहज मार्ग पद्धति में ध्यान लगाने के लिए किसी आरगनाइज़र (organiser) से संपर्क करने की आवश्यकता है जो उक्त (ऊपर कही गई) बात को  सही तरीके से समझा कर ईश्वरीय शक्ति से प्रार्थना द्वारा आपका संबंध जुड़वा देता है। तत्पश्चात् प्राणाहुति (transmission) की क्रिया शुरू हो जाती है । जिसके फलस्वरूप इसी जीवन काल में अंतिम ध्येय/लक्ष्य की प्राप्ति संभव हो जाती है ।

 

सहज मार्ग की प्रार्थना जो कि प्रकृति से आई है इस प्रकार है

 

हे नाथ ! तू ही मनुष्य जीवन का ध्येय है

हमारी इच्छायें हमारी उन्नति में बाधक हैं

तू ही हमारा एकमात्र स्वामी और ईष्ट है

बिना तेरी सहायता तेरी प्राप्ति असंभव है

 

करिये और अनुभव लाभ लीजिए

सोसायटी फार बाबूजीज़ मिशन

-6/2 राणा प्रताप बाग,

दिल्ली - 110007

मोबाइल नं0 0-9811678581

श्री शरदचन्द्र  0-9941497128

 

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