Precautionary Measures contained in Sahaj Marg against BADtraining of Mind -- Rev, Babuji in Efficacy of Rajayoga in the light of Sahaj Marg.

Posted On Thursday, September 22, 2016 | 10:57:32 AM

Precautionary measures contained in Sahaj Marg  against bad training of Mind.
"We attach importance to one and the same thing. If we pump out water straight into a channel  it will flow by its own force to some extent and at the same time with the help of the machinery  ‍attached at  the end of the butt.
Similarly we proceed in the channel of Almighty with the thread of thought , attaching our will-force at its butt end, i.e., from the starting point.
The  will force comes from the individual mind which makes our way clear. 
We keep the idea of pumping out a certain thing from its proper place called the individual mind.
The force increases day by day; and our individual mind too, having the idea of going above, becomes stronger and thus begins to lose the effect of bad training.
It serves  a double purpose . It cleans the individual mind , and also brings the goal of human life within reach."
Rev.Babuji 
wrote in His book _
Efficacy of Raja-Yoga in the Light of SAHAJ Marg .
"सहज मार्ग में निहित सावधानियाँ ताकि दिमाग पर दोष -युक्त प्रशिक्षण का प्रभाव न हो सके"
 - सहज मार्ग के प्रकाश में राजयोग का दिव्य दर्शन में सद् गुरू पूज्य बाबूजी महाराज लिखते हैं कि :-
"हम एक और उसी एक वस्तु को महत्व देने लगते हैं । यदि पिचकारी द्वारा हम किसी एक नाली में जल भरें तो वह कुछ सीमा तक अपनी ही शक्ति से जायेगा और साथ ही पीछे की ओर लगे यन्त्र से और सहायता मिलेगी ।
ऐसे ही सर्व शक्तिमान के मार्ग पर विचार के घागे के सहारे उसमें पीछे की ओर अर्थात  आरम्भ- बिन्दु पर अपनी इच्छा- शक्ति को जोङते हुये हं आगे बढ़ते  हैं ।
इच्छा-शक्ति व्यक्ति के मन से आती है जो हमारे मार्ग को स्पष्ट करती है ।
एक निश्चित वस्तु पर उसके उचित स्थान से , जिसको वैयक्तिक  मन  कहा जाता है, पिचकारी द्वारा भरते रहने का विचार हम बनाये रखते हैं . दिन- प्रति- दिन शक्ति बढ़ती रहती है ; और ऊपर उठने का विचार रखते हुये हमारा वैयक्तिक मन भी बलवान बनता है और इस भाँति दोष-युक्त प्रशिक्षण का प्रभाव घटने लगता है ।
यब दोहरा उद्देश्य पूरा करता है ।
यह वैयक्तिक मन को शुद्ध करता है साथ-साथ मानव जीवन के लक्ष्य को पहुँच की सीमा में ला देता है । "
Babuji's MISSION.
.


Posted By : vishnukumar  |  Total views : 589