पृष्ठ -२...... सहज मार्ग दर्शन -Sahaj Marg Philosophy - महात्मा राम चंद्र Special Personality

Posted On Sunday, August 21, 2016 | 1:16:42 PM

  पृष्ठ -२......  सहज मार्ग दर्शन -Sahaj Marg Philosophy
           -              महात्मा राम चंद्र Special Personality
प्रत्येक मनुष्य को घटित होने वाले का सहर्ष स्वागत करना चाहिए  और अध्यात्मिकता  के पथ पर आना चाहिए जिस में ही उसके कल्याण का संवर्धन
निहित है । मैं यहाँ पर महानतम दर्शन उजागर कर रहा हूँ । प्रारम्भ में लोग इसको सम्भवत: न समझ पावें परन्तु कालान्तर में वे अवश्य
ही इसका इसी रूप में अनुभव करने लगेंगे ।
 
सहज मार्ग का इतिहास
           महान व्यक्ति यों ही (आकस्मिक रूप से ) नहीं पैदा हो जाते हैं । जब विश्व  उनके लिए अत्यंत लालायित होकर इच्छा एवं प्रतीक्षा करता है तब वे पैदा होते
हैं । यह प्राकृतिक घटना है । आध्यात्मिकता का आवास भारत , अँधेरे में टटोल रहा था और युगों की प्राचीन योग प्रणाली को पूरी तरह भूल चुका था ।  ठोस
द्रव्यात्मक भावना ने सूक्षम आध्यात्मिकता का स्थान ले लिया था । अज्ञान के काले बादल चारों ओर मँडरा रहे थे । यौगिक प्राणाहुति हिन्दुओं के लिए बिल्कुल
अजनबी सी चीज हो गई थी । ऐसी स्थिति में जब आध्यात्मिकता असहाय होकर लड़खड़ा रही थी, किसी महान व्यक्तित्व  की आवश्यकता थी, जो मानवता के
उद्धार के लिए चीजों को सुव्यवस्थित कर सके ।   
          यह २ फरवरी १८७३ को बसंत पंचमी का शुभ दिन था जब प्रकृति की शक्ति पृथ्वी पर समर्थ गुरु महात्मा श्री राम चंद्र जी महाराज के रूप में उ०प्र० के
फर्रूखाबाद जिले के फतेहगढ़ स्थान पर उतरी । इस आनन्ददायक दिन का समन्वय वर्ष की सुंदरतम ऋतु से इस प्रकार हुआ कि जिसने बसंत की पूर्णतम
ताजगी प्रत्येक ह्रदय में भर दी । उनके पादुर्भाव के आनन्दमय काल ने आध्यात्मिक जागरण के एक नए युग का प्रारम्भ किया जिस में मानव अस्तित्व
की समस्या का व्यवहारिक हल मिलता है । उनके द्वारा लाये गये आध्यात्मिक क्षेत्र में शानदार पुनर्जागरण को जब हम अपने मन में याद करते हैं तो एक
श्रद्धामय आनन्ददायक विस्मय से स्तब्ध रह जाते हैं । वे अस्तित्व  की समस्या का एक सरल हल प्रस्तुत करते हैं जो सदैव से बड़े-से-बड़े मनीषियों को भी
 भ्रमित करता रहा है ।
           इस दैवी व्यक्तित्व का पादुर्भाव   एक सम्माननिय कायस्थ परिवार में  हुआ था । उनका बचपन उनकी माता से प्रभावित था जो एक सुसंस्कृत  और
सरलमना महिला थीं और जो अपना अधिकांश समय भक्ति और पूजा में  बिताती थीं । उनके प्रभाव के कारण उन्होंने अत्यंत प्रारम्भिक आयु में ही अंत:
 प्रेरणा प्राप्त की । घटना इस प्रकार है कि एक दिन जब वे अपने साथियों के साथ खेल  रहे थे तो किसी दिव्य शक्ति ने उनके मन में यह भाव जागृत
किया कि वे उस  प्रयोजनके लिए जिससे वे संलग्न हैं नहीं आए हैं । उन्हें आत्म साक्षात्कार करके भविष्य के लिये अपने को लैस करना है । 
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